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नमस्कार दोस्तों आपका स्वागत हैं आपके अपने ब्लॉग GyaniLekh पे और आज हम बात करने वाले हैं।एक ऐसे व्यकितत्व के बारे में जिन्होंने भारत के प्रति पूरी विश्व की मानसिकता को बदल कर रख दिया । 1893 ई. में उनके द्वारा विश्व धर्म संसद(शिकागो, अमेरिका) में दिये गए भाषण आज भी अमर हैं।उनके जन्मदिवस को प्रति वर्ष युवा दिवस के रूप में मनाया जाता हैं।
2. एक समय में एक काम करो,और ऐसा करते समय अपनी पूरी आत्मा उसमें डाल दो।
3. जब तक आप खुद पे विश्वास नहीं करते तब तक आप भगवान पे विश्वास नहीं कर सकते।
4. कभी मत सोचिये कि आत्मा के लिए कुछ असंभव है।ऐसा सोचना सबसे बड़ा विधर्म है।अगर कोई पाप है, तो वो यही है; ये कहना कि तुम निर्बल हो या अन्य निर्बल है।
5. शारीरिक,बौद्धिक और आध्यात्मिक रूप से जो कुछ भी कमजोर बनाता है - उसे जहर की तरह त्याग दो।
6. दिल और दिमाग के टकराव में दिल की सुनो।
7. विश्व एक व्यायामशाला है जहाँ हम खुद को मजबूत बनाने के लिए आते हैं।
8. किसी दिन जब आपके सामने कोई समस्या ना आये- आप सुनिश्चित हो सकते हैं कि आप गलत मार्ग पे जा रहे है।
9. एक शब्द में,यह आदर्श है कि तुम परमात्मा हो।
10. शक्ति जीवन है,निर्बलता मृत्यु है।विस्तार जीवन है,संकुचन मृत्यु है।प्रेम जीवन है,द्वेष मृत्यु है।
11. जितना बड़ा संघर्ष होगा,जीत उतनी शानदार होगी।
तो दोस्तों आज का यह लेख यही समाप्त होता हैं।यदि यह लेख आपको पसंद आया तो अपने दोस्तों के साथ शेयर करना भूले। आगे हम इसी तरह के पोस्ट आपके साथ साझा करेंगे तो आप हमारे ब्लॉग को रोज विजिट करना न भूले।
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धन्यवाद।
नमस्कार दोस्तों आपका स्वागत हैं आपके अपने ब्लॉग GyaniLekh पे और आज हम बात करने वाले हैं।एक ऐसे व्यकितत्व के बारे में जिन्होंने भारत के प्रति पूरी विश्व की मानसिकता को बदल कर रख दिया । 1893 ई. में उनके द्वारा विश्व धर्म संसद(शिकागो, अमेरिका) में दिये गए भाषण आज भी अमर हैं।उनके जन्मदिवस को प्रति वर्ष युवा दिवस के रूप में मनाया जाता हैं।
स्वामी विवेकानंद का जीवन।।Life of swami Vivekanand in hindi .
स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 ई. को कलकत्ता के एक कुलीन बंगाली परिवार में हुआ था।उनके बचपन का नाम नरेन्द्रनाथ दत्त था।उनके पिता विश्वनाथ दत्त कलकत्ता हाई कोर्ट के एक प्रसिद्ध वकील थे जबकि उनकी माता भुवनेश्वरी देवी धार्मिक विचारों की महिला थी।उनकी माता भगवान शिव को अपना आराध्य मानती थी और भगवान शिव के आशीर्वाद से ही विवेकानन्द का जन्म हुआ था। वे बचपन से ही अत्यंत कुशाग्र बुद्धि के थे और अपने साथी बच्चों के साथ शरारत भी करते थे।उनके घर में समय-समय पर धार्मिक अनुष्ठान होते थे और घर का माहौल काफी धार्मिक था।इसी धार्मिक माहौल के प्रभाव से विवेकानन्द जी का झुकाव हिन्दू धर्मग्रंथों की ओर होने लगा।वे बचपन से ही पौराणिक कथाओं को पढ़कर अत्यन्त जटिल प्रश्न पूछ देते थे जिनका जवाब उनके माता और पण्डितजी भी नहीं दे पाते थे।यहीं से उनके मन में गहरा प्रभाव पड़ता गया और उसका परिणाम आज पूरे विश्व के सामने है। रविंद्रनाथ टैगोर ने तो उनके बारे में यँहा तक कहा था कि -उन्होंने अपने गुरु के रूप में रामकृष्ण परमहंस को चुना और अंतिम क्षण तक उनके सेवा में तत्पर रहें।उन्होंने अपने गुरु के उपदेशों का जीवन भर अनुसरण किया और उनके अधूरे सपनो को भी पूरा किया । वे मात्र 25 वर्ष की अवस्था में ही पूरे भारत की पैदल यात्रा पर निकल पड़े ।इतना ही नहीं उन्होंने विश्व धर्म संसद सम्मेलन(सितंबर,1893) में आयोजित हिन्दू धर्म का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने 4 जुलाई 1902 ई. को ध्यानमग्न होकर अपना देह त्याग दिया।उनके मरणोपरांत उनके शिष्यों द्वारा विवेकानंद तथा उनके गुरु रामकृष्ण के संदेशों को जनसामान्य तक पहुंचाने के लिए रामकृष्ण मिशन की शाखाओं का विस्तार किया।यदि आप भारत को जानना चाहते हैं तो विवेकानंद को पढिये । उनमें आप सब कुछ सकरात्मक ही पायेंगे, नकरात्मक कुछ भी नहीं
स्वामी विवेकानंद के महत्वपूर्ण कथन ।।Important quotes by Swami Vivekanand.
1. उठो,जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य ना प्राप्त हो जाये।2. एक समय में एक काम करो,और ऐसा करते समय अपनी पूरी आत्मा उसमें डाल दो।
3. जब तक आप खुद पे विश्वास नहीं करते तब तक आप भगवान पे विश्वास नहीं कर सकते।
4. कभी मत सोचिये कि आत्मा के लिए कुछ असंभव है।ऐसा सोचना सबसे बड़ा विधर्म है।अगर कोई पाप है, तो वो यही है; ये कहना कि तुम निर्बल हो या अन्य निर्बल है।
5. शारीरिक,बौद्धिक और आध्यात्मिक रूप से जो कुछ भी कमजोर बनाता है - उसे जहर की तरह त्याग दो।
6. दिल और दिमाग के टकराव में दिल की सुनो।
7. विश्व एक व्यायामशाला है जहाँ हम खुद को मजबूत बनाने के लिए आते हैं।
8. किसी दिन जब आपके सामने कोई समस्या ना आये- आप सुनिश्चित हो सकते हैं कि आप गलत मार्ग पे जा रहे है।
9. एक शब्द में,यह आदर्श है कि तुम परमात्मा हो।
10. शक्ति जीवन है,निर्बलता मृत्यु है।विस्तार जीवन है,संकुचन मृत्यु है।प्रेम जीवन है,द्वेष मृत्यु है।
11. जितना बड़ा संघर्ष होगा,जीत उतनी शानदार होगी।
तो दोस्तों आज का यह लेख यही समाप्त होता हैं।यदि यह लेख आपको पसंद आया तो अपने दोस्तों के साथ शेयर करना भूले। आगे हम इसी तरह के पोस्ट आपके साथ साझा करेंगे तो आप हमारे ब्लॉग को रोज विजिट करना न भूले।
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